ततः किल किला शब्दं शुश्रावासन्नमम्बरे ।
हनूमत्कर्मदृप्तानां नर्दतां काननौकसाम् ।
किष्किन्धामुपयातानां सिद्धिं कथयतामिव ॥
ततः किल किला शब्दं शुश्रावासन्नमम्बरे ।
हनूमत्कर्मदृप्तानां नर्दतां काननौकसाम् ।
किष्किन्धामुपयातानां सिद्धिं कथयतामिव ॥
अन्वयः
अमितविक्रमः extremely valiant, सम्प्रति at this time, चिन्तासमायुक्तः anxious, मा भूः do not, ततः at that time, हनुमत्कर्मदृप्तानाम् in the pride of Hanuman's success, नार्धताम् roaring, सिद्धिम् successfully completed the work, कथयतामिव talking, किष्किन्धाम् in Kishkinda, उपयातानाम् have reached, काननौकसाम् forestdwellers, vanaras, अम्बरे in the sky, आसन्नम् have arrived, किलकिलाशब्दम् chatterings, शुश्राव was heard.M N Dutt
Thereupon he heard in the sky the joyous sounds of the monkeys proud on account of Hanuman's work, proceeding towards Kişkindhā and as if announcing their success.Summary
"You are extremely valiant and it is unbecoming of you to be anxious at this time Rama. Just then chatterings of the monkeys were heard from the sky as they roared in pride talking of Hanuman's achievement. Having successfully completed the errand, they have arrived at Kishkinda.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| किलकिलाशब्दं | किलकिला–शब्द (२.१) |
| शुश्रावासन्नम् | शुश्राव (√श्रु लिट् प्र.पु. एक.)–आसन्न (√आ-सद् + क्त, २.१) |
| अम्बरे | अम्बर (७.१) |
| हनूमत्कर्मदृप्तानां | हनुमन्त्–कर्मन्–दृप्त (√दृप् + क्त, ६.३) |
| नर्दतां | नर्दत् (√नर्द् + शतृ, ६.३) |
| काननौकसाम् | काननौकस् (६.३) |
| किष्किन्धाम् | किष्किन्धा (२.१) |
| उपयातानां | उपयात (√उप-या + क्त, ६.३) |
| सिद्धिं | सिद्धि (२.१) |
| कथयताम् | कथयत् (√कथय् + शतृ, ६.३) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | कि | ल | कि | ला | श | ब्दं | शु | श्रा | वा | स |
| न्न | म | म्ब | रे | ह | नू | म | त्क | र्म | दृ | प्ता | नां |
| न | र्द | तां | का | न | नौ | क | साम् | कि | ष्कि | न्धा | मु |
| प | या | ता | नां | सि | द्धिं | क | थ | य | ता | मि | व |