पदच्छेदः
| एष | एतद् (१.१) |
| चूडामणिः | चूडामणि (१.१) |
| श्रीमान्मया | श्रीमत् (१.१)–मद् (३.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| यत्नरक्षितः | यत्न–रक्षित (√रक्ष् + क्त, १.१) |
| मनःशिलायास्तिलकस्तं | मनःशिला (६.१)–तिलक (१.१)–तद् (२.१) |
| स्मरस्वेति | स्मरस्व (√स्मृ लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| चाब्रवीत् | च (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ष | चू | डा | म | णिः | श्री | मा |
| न्म | या | ते | य | त्न | र | क्षि | तः |
| म | नः | शि | ला | या | स्ति | क | ल |
| स्तं | स्म | र | स्वे | ति | चा | ब्र | वीत् |