M N Dutt
Beholding Vibhīşaņa the lord of Rākşasas installed in the city of Lankä, Räghava along with Lakşmaņa attained to an excess of delight.
पदच्छेदः
| दृष्ट्वाभिषिक्तं | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा)–अभिषिक्त (√अभि-सिच् + क्त, २.१) |
| लङ्कायां | लङ्का (७.१) |
| राक्षसेन्द्रं | राक्षस–इन्द्र (२.१) |
| विभीषणम् | विभीषण (२.१) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| परमां | परम (२.१) |
| प्रीतिं | प्रीति (२.१) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सहलक्ष्मणः | सहलक्ष्मण (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दृ | ष्ट्वा | भि | षि | क्तं | ल | ङ्का | यां |
| रा | क्ष | से | न्द्रं | वि | भी | ष | णम् |
| रा | घ | वः | प | र | मां | प्री | तिं |
| ज | गा | म | स | ह | ल | क्ष्म | णः |