पदच्छेदः
| संस्कारास्ते | संस्कार (१.३)–त्वद् (६.१) |
| ऽभवन् | अभवन् (√भू लङ् प्र.पु. बहु.) |
| वेदा | वेद (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| तद् | तद् (१.१) |
| अस्ति | अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| विना | विना (अव्ययः) |
| जगत् | जगन्त् (१.१) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| शरीरं | शरीर (१.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| स्थैर्यं | स्थैर्य (१.१) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| वसुधातलम् | वसुधा–तल (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | स्का | रा | स्ते | ऽभ | व | न्वे | दा |
| न | त | द | स्ति | त्व | या | वि | ना |
| ज | ग | त्स | र्वं | श | री | रं | ते |
| स्थै | र्यं | ते | व | सु | धा | त | लम् |