पदच्छेदः
| देवा | देव (१.३) |
| गात्रेषु | गात्र (७.३) |
| लोमानि | लोमन् (१.३) |
| निर्मिता | निर्मित (√निः-मा + क्त, १.३) |
| ब्रह्मणा | ब्रह्मन् (३.१) |
| प्रभो | प्रभु (८.१) |
| निमेषस्ते | निमेष (१.१)–त्वद् (६.१) |
| ऽभवद् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| रात्रिर् | रात्रि (१.१) |
| उन्मेषस्ते | उन्मेष (१.१)–त्वद् (६.१) |
| ऽभवद् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| दिवा | दिवन् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | वा | गा | त्रे | षु | लो | मा | नि |
| नि | र्मि | ता | ब्र | ह्म | णा | प्र | भो |
| नि | मे | ष | स्ते | ऽभ | व | द्रा | त्रि |
| रु | न्मे | ष | स्ते | ऽभ | व | द्दि | वा |