महेन्द्रश्च कृतो राजा बलिं बद्ध्वा महासुरम् ।
सीता लक्ष्मीर्भवान्विष्णुर्देवः कृष्णः प्रजापतिः ॥
महेन्द्रश्च कृतो राजा बलिं बद्ध्वा महासुरम् ।
सीता लक्ष्मीर्भवान्विष्णुर्देवः कृष्णः प्रजापतिः ॥
पदच्छेदः
| महेन्द्रश्च | महत्–इन्द्र (१.१)–च (अव्ययः) |
| कृतो | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| बलिं | बलि (२.१) |
| बद्ध्वा | बद्ध्वा (√बन्ध् + क्त्वा) |
| महासुरम् | महत्–असुर (२.१) |
| सीता | सीता (१.१) |
| लक्ष्मीर् | लक्ष्मी (१.१) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| विष्णुर् | विष्णु (१.१) |
| देवः | देव (१.१) |
| कृष्णः | कृष्ण (१.१) |
| प्रजापतिः | प्रजापति (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | हे | न्द्र | श्च | कृ | तो | रा | जा |
| ब | लिं | ब | द्ध्वा | म | हा | सु | रम् |
| सी | ता | ल | क्ष्मी | र्भ | वा | न्वि | ष्णु |
| र्दे | वः | कृ | ष्णः | प्र | जा | प | तिः |