पदच्छेदः
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| राज्यम् | राज्य (२.१) |
| अयोध्यायां | अयोध्या (७.१) |
| नन्दयित्वा | नन्दयित्वा (√नन्दय् + क्त्वा) |
| सुहृज्जनम् | सुहृद्–जन (२.१) |
| इक्ष्वाकूणां | इक्ष्वाकु (६.३) |
| कुले | कुल (७.१) |
| वंशं | वंश (२.१) |
| स्थापयित्वा | स्थापयित्वा (√स्थापय् + क्त्वा) |
| महाबल | महत्–बल (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | प्य | रा | ज्य | म | यो | ध्या | यां |
| न | न्द | यि | त्वा | सु | हृ | ज्ज | नम् |
| इ | क्ष्वा | कू | णां | कु | ले | वं | शं |
| स्था | प | यि | त्वा | म | हा | ब | ल |