पदच्छेदः
| आर्यपादौ | आर्य–पाद (२.२) |
| गृहीत्वा | गृहीत्वा (√ग्रह् + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शिरसा | शिरस् (३.१) |
| धर्मकोविदः | धर्म–कोविद (१.१) |
| पाण्डुरं | पाण्डुर (२.१) |
| छत्रम् | छत्त्र (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| शुक्लमाल्योपशोभितम् | शुक्ल–माल्य–उपशोभित (√उप-शोभय् + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | र्य | पा | दौ | गृ | ही | त्वा | तु |
| शि | र | सा | ध | र्म | को | वि | दः |
| पा | ण्डु | रं | छ | त्र | मा | दा | य |
| शु | क्ल | मा | ल्यो | प | शो | भि | तम् |