पदच्छेदः
| माल्यमोदकहस्तैश्च | माल्य–मोदक–हस्त (३.३)–च (अव्ययः) |
| मन्त्रिभिर् | मन्त्रिन् (३.३) |
| भरतो | भरत (१.१) |
| वृतः | वृत (√वृ + क्त, १.१) |
| शङ्खभेरीनिनादैश्च | शङ्ख–भेरी–निनाद (३.३)–च (अव्ययः) |
| बन्दिभिश्चाभिवन्दितः | बन्दिन् (३.३)–च (अव्ययः)–अभिवन्दित (√अभि-वन्द् + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मा | ल्य | मो | द | क | ह | स्तै | श्च |
| म | न्त्रि | भि | र्भ | र | तो | वृ | तः |
| श | ङ्ख | भे | री | नि | ना | दै | श्च |
| ब | न्दि | भि | श्चा | भि | व | न्दि | तः |