पदच्छेदः
| एष | एतद् (१.१) |
| कोटीसहस्रेण | कोटि–सहस्र (३.१) |
| वानराणां | वानर (६.३) |
| महौजसाम् | महत्–ओजस् (६.३) |
| आकाङ्क्षते | आकाङ्क्षते (√आ-काङ्क्ष् लट् प्र.पु. एक.) |
| त्वां | त्वद् (२.१) |
| संग्रामे | संग्राम (७.१) |
| जेतुं | जेतुम् (√जि + तुमुन्) |
| परपुरंजय | परपुरंजय (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ष | को | टी | स | ह | स्रे | ण |
| वा | न | रा | णां | म | हौ | ज | साम् |
| आ | का | ङ्क्ष | ते | त्वां | सं | ग्रा | मे |
| जे | तुं | प | र | पु | रं | ज | य |