पुरुषस्य हि लोकेऽस्मिञ्शोकः शौर्यापकर्षणः ।
यत्तु कार्यं मनुष्येण शौण्डीर्यमवलम्बता ।
शूराणां हि मनुष्याणां त्वद्विधानां महात्मनाम् ॥
पुरुषस्य हि लोकेऽस्मिञ्शोकः शौर्यापकर्षणः ।
यत्तु कार्यं मनुष्येण शौण्डीर्यमवलम्बता ।
शूराणां हि मनुष्याणां त्वद्विधानां महात्मनाम् ॥
पदच्छेदः
| पुरुषस्य | पुरुष (६.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| लोके | लोक (७.१) |
| ऽस्मिञ् | इदम् (७.१) |
| शोकः | शोक (१.१) |
| शौर्यापकर्षणः | शौर्य–अपकर्षण (१.१) |
| यत् | यद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| कार्यं | कार्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| मनुष्येण | मनुष्य (३.१) |
| शौण्डीर्यम् | शौण्डीर्य (१.१) |
| अवलम्बता | अवलम्बत् (√अव-लम्ब् + शतृ, ३.१) |
| शूराणां | शूर (६.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मनुष्याणां | मनुष्य (६.३) |
| त्वद्विधानां | त्वद्विध (६.३) |
| महात्मनाम् | महात्मन् (६.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | रु | ष | स्य | हि | लो | के | ऽस्मि | ञ्शो | कः | शौ | र्या |
| प | क | र्ष | णः | य | त्तु | का | र्यं | म | नु | ष्ये | ण |
| शौ | ण्डी | र्य | म | व | ल | म्ब | ता | शू | रा | णां | हि |
| म | नु | ष्या | णां | त्व | द्वि | धा | नां | म | हा | त्म | नाम् |