पदच्छेदः
| एतैः | एतद् (३.३) |
| सर्वैर् | सर्व (३.३) |
| अभिज्ञानैर् | अभिज्ञान (३.३) |
| अभिज्ञाय | अभिज्ञाय (√अभि-ज्ञा + ल्यप्) |
| सुदुःखिता | सु (अव्ययः)–दुःखित (१.१) |
| विजगर्हे | विजगर्हे (√वि-गर्ह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ऽथ | अथ (अव्ययः) |
| कैकेयीं | कैकेयी (२.१) |
| क्रोशन्ती | क्रोशत् (√क्रुश् + शतृ, १.१) |
| कुररी | कुररी (१.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | तैः | स | र्वै | र | भि | ज्ञा | नै |
| र | भि | ज्ञा | य | सु | दुः | खि | ता |
| वि | ज | ग | र्हे | ऽथ | कै | के | यीं |
| क्रो | श | न्ती | कु | र | री | य | था |