करालो विकटो मुण्डः पुरुषः कृष्णपिङ्गलः ।
कालो गृहाणि सर्वेषां काले कालेऽन्ववेक्षते ।
एतान्यन्यानि दुष्टानि निमित्तान्युत्पतन्ति च ॥
करालो विकटो मुण्डः पुरुषः कृष्णपिङ्गलः ।
कालो गृहाणि सर्वेषां काले कालेऽन्ववेक्षते ।
एतान्यन्यानि दुष्टानि निमित्तान्युत्पतन्ति च ॥
अन्वयः
पक्षिणः birds, सर्वे all, मृगाः animals, प्रत्यादित्यम् hostile, रुदन्ति crying, कराळः dreadful, विकटः monstrous, मुण्डः shaven head, परुषः male, कृष्णपिङ्गळः blackish, कालः time, कालेकाले at all times, सर्वेषाम् all, गृहाणि households, अन्ववेक्षते considering, एतानि all this, अन्यानि complete, दुष्टानि sinister निमित्तानि portents, उत्पतन्ति making appearance.Summary
All birds and animals are making hostile noise. Time is always coming in a dreadful and monstrous blackish form with a shaved head, morning, and evening. Considering all these sinister portents are making an appearance at all households.पदच्छेदः
| करालो | कराल (१.१) |
| विकटो | विकट (१.१) |
| मुण्डः | मुण्ड (१.१) |
| पुरुषः | पुरुष (१.१) |
| कृष्णपिङ्गलः | कृष्ण–पिङ्गल (१.१) |
| कालो | काल (१.१) |
| गृहाणि | गृह (२.३) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| काले | काल (७.१) |
| काले | काल (७.१) |
| ऽन्ववेक्षते | अन्ववेक्षते (√अन्वव-ईक्ष् लट् प्र.पु. एक.) |
| एतान्यन्यानि | एतद् (१.३)–अन्य (१.३) |
| दुष्टानि | दुष्ट (√दुष् + क्त, १.३) |
| निमित्तान्युत्पतन्ति | निमित्त (१.३)–उत्पतन्ति (√उत्-पत् लट् प्र.पु. बहु.) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | रा | लो | वि | क | टो | मु | ण्डः | पु | रु | षः | कृ |
| ष्ण | पि | ङ्ग | लः | का | लो | गृ | हा | णि | स | र्वे | षां |
| का | ले | का | ले | ऽन्व | वे | क्ष | ते | ए | ता | न्य | न्या |
| नि | दु | ष्टा | नि | नि | मि | त्ता | न्यु | त्प | त | न्ति | च |