पदच्छेदः
| विविशुस्ते | विविशुः (√विश् लिट् प्र.पु. बहु.)–तद् (१.३) |
| ततस्तानि | ततस् (अव्ययः)–तद् (२.३) |
| वनान्युपवनानि | वन (२.३)–उपवन (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| हृष्टाः | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.३) |
| प्रमुदिता | प्रमुदित (√प्र-मुद् + क्त, १.३) |
| वीरा | वीर (१.३) |
| हरयः | हरि (१.३) |
| कामरूपिणः | कामरूपिन् (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | वि | शु | स्ते | त | त | स्ता | नि |
| व | ना | न्यु | प | व | ना | नि | च |
| हृ | ष्टाः | प्र | मु | दि | ता | वी | रा |
| ह | र | यः | का | म | रू | पि | णः |