अन्वयः
सः he, Rama, विज्यम् quitting, भिन्नमुष्टिपरीणाहम् strung and bent at both ends, three places, रुक्मभूषितम् gold plated, कार्मुकम् bow, आदाय holding, वीरशयने hero's bed, शिश्ये relaxed.
Summary
Rama lay relaxed on the hero's bed quitting his goldplated bow strung and bent at both ends, and the middle.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| वीरशयने | वीर–शयन (७.१) |
| शिश्ये | शिश्ये (√शी लिट् प्र.पु. एक.) |
| विज्यम् | विज्य (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| कार्मुकम् | कार्मुक (२.१) |
| भिन्नमुष्टिपरीणाहं | भिन्न (√भिद् + क्त)–मुष्टि–परीणाह (२.१) |
| त्रिणतं | त्रिणत (२.१) |
| रुक्मभूषितम् | रुक्म–भूषित (√भूषय् + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | वी | र | श | य | ने | शि | श्ये |
| वि | ज्य | मा | दा | य | का | र्मु | कम् |
| भि | न्न | मु | ष्टि | प | री | णा | हं |
| त्रि | ण | तं | रु | क्म | भू | षि | तम् |