पदच्छेदः
| अन्तरिक्षात् | अन्तरिक्ष (५.१) |
| पपातोल्का | पपात (√पत् लिट् प्र.पु. एक.)–उल्का (१.१) |
| वायुश्च | वायु (१.१)–च (अव्ययः) |
| परुषो | परुष (१.१) |
| ववौ | ववौ (√वा लिट् प्र.पु. एक.) |
| अन्योन्यम् | अन्योन्य (२.१) |
| अभिसंरब्धा | अभिसंरब्ध (√अभिसम्-रभ् + क्त, १.३) |
| ग्रहाश्च | ग्रह (१.३)–च (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| चकाशिरे | चकाशिरे (√काश् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न्त | रि | क्षा | त्प | पा | तो | ल्का |
| वा | यु | श्च | प | रु | षो | व | वौ |
| अ | न्यो | न्य | म | भि | सं | र | ब्धा |
| ग्र | हा | श्च | न | च | का | शि | रे |