स तत्तदा भग्नमवेक्ष्य शूलं; चुकोप रक्षोऽधिपतिर्महात्मा ।
उत्पाट्य लङ्कामलयात्स शृङ्गं; जघान सुग्रीवमुपेत्य तेन ॥
स तत्तदा भग्नमवेक्ष्य शूलं; चुकोप रक्षोऽधिपतिर्महात्मा ।
उत्पाट्य लङ्कामलयात्स शृङ्गं; जघान सुग्रीवमुपेत्य तेन ॥
अन्वयः
महात्मा great soul, सः he, रक्षोधिपतिः Lord of Rakshasas, तत् there, शूलम् pike, तथा that way, भग्नम् broken, अवेक्ष्य seeing, चुकोप highly enraged, लङ्कामलयात् Malaya from Lanka, शृङ्गम् mountain, उत्पाट्य taking hold, सुग्रीवम् at Sugriva, उपेत्यतेन approaching, जघान struck.M N Dutt
Then the mighty-minded lord of Rákşasas seeing the dart thus severed, uprooted a peak from the Malaya and with it smote Sugrīva.Summary
That great soul, the Lord of Rakshasas seeing the pike broken in that way, was highly enraged. Taking Malaya Mountain from Lanka, he struck Sugriva who was approaching him.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| भग्नम् | भग्न (√भञ्ज् + क्त, २.१) |
| अवेक्ष्य | अवेक्ष्य (√अव-ईक्ष् + ल्यप्) |
| शूलं | शूल (२.१) |
| चुकोप | चुकोप (√कुप् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रक्षोऽधिपतिर् | रक्षस्–अधिपति (१.१) |
| महात्मा | महात्मन् (१.१) |
| उत्पाट्य | उत्पाट्य (√उत्-पाटय् + ल्यप्) |
| लङ्कामलयात् | लङ्का–मलय (५.१) |
| स | तद् (१.१) |
| शृङ्गं | शृङ्ग (२.१) |
| जघान | जघान (√हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सुग्रीवम् | सुग्रीव (२.१) |
| उपेत्य | उपेत्य (√उप-इ + ल्यप्) |
| तेन | तद् (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त | त्त | दा | भ | ग्न | म | वे | क्ष्य | शू | लं |
| चु | को | प | र | क्षो | ऽधि | प | ति | र्म | हा | त्मा |
| उ | त्पा | ट्य | ल | ङ्का | म | ल | या | त्स | शृ | ङ्गं |
| ज | घा | न | सु | ग्री | व | मु | पे | त्य | ते | न |