तमभ्युपेत्याद्भुतघोरवीर्यं; स कुम्भकर्णो युधि वानरेन्द्रम् ।
जहार सुग्रीवमभिप्रगृह्य; यथानिलो मेघमतिप्रचण्डः ॥
तमभ्युपेत्याद्भुतघोरवीर्यं; स कुम्भकर्णो युधि वानरेन्द्रम् ।
जहार सुग्रीवमभिप्रगृह्य; यथानिलो मेघमतिप्रचण्डः ॥
अन्वयः
सः he, कुम्भकर्णः Kumbhakarna, युधि battle, अद्भुतघोरवीर्यम् wonderful and dreadful valour, वानरेन्द्रम् Vanara Lord, तंसुग्रीवम् that Sugriva, अभिप्रगृह्य taking up again, अतिप्रचण्डः highly tempestuous, अनिलः wind, मेघंयथा like cloud, जहार took him.M N Dutt
Then Kumbhakarna coming to the wonderfully mighty master of monkeys, took him up and stole away from the field, as a violent gust of wind steal away a patch of cloud.Summary
Kumbhakarna approaching the Vanara Lord Sugriva endowed with wonderful and dreadful prowess, went like wind carrying clouds taking him.पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अभ्युपेत्याद्भुतघोरवीर्यं | अभ्युपेत्य (√अभ्युप-इ + ल्यप्)–अद्भुत–घोर–वीर्य (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| कुम्भकर्णो | कुम्भकर्ण (१.१) |
| युधि | युध् (७.१) |
| वानरेन्द्रम् | वानर–इन्द्र (२.१) |
| जहार | जहार (√हृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| सुग्रीवम् | सुग्रीव (२.१) |
| अभिप्रगृह्य | अभिप्रगृह्य (√अभिप्र-ग्रह् + ल्यप्) |
| यथानिलो | यथा (अव्ययः)–अनिल (१.१) |
| मेघम् | मेघ (२.१) |
| अतिप्रचण्डः | अति (अव्ययः)–प्रचण्ड (१.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | भ्यु | पे | त्या | द्भु | त | घो | र | वी | र्यं |
| स | कु | म्भ | क | र्णो | यु | धि | वा | न | रे | न्द्रम् |
| ज | हा | र | सु | ग्री | व | म | भि | प्र | गृ | ह्य |
| य | था | नि | लो | मे | घ | म | ति | प्र | च | ण्डः |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||