अन्वयः
व्निध्यमन्दरसङ्काशम् like Vindhya or Mandara, काञ्चनाङ्गदभूषणम् adorned with gold armlets, वक्त्रात् from the mouth, रुधिरम् blood, स्रवन्तम् flowing, उथतितम् ejecting, वर्षामेघामिव like a rain cloud.
Summary
(Kumbhakarna) Adorned with gold armlets, blood flowing from his mouth was like a rain cloud showering from Vindhya or Mandara mountain.
पदच्छेदः
| विन्ध्यमन्दरसंकाशं | विन्ध्य–मन्दर–संकाश (२.१) |
| काञ्चनाङ्गदभूषणम् | काञ्चन–अङ्गद–भूषण (२.१) |
| स्रवन्तं | स्रवत् (√स्रु + शतृ, २.१) |
| रुधिरं | रुधिर (२.१) |
| वक्त्राद् | वक्त्र (५.१) |
| वर्षमेघम् | वर्ष–मेघ (२.१) |
| इवोत्थितम् | इव (अव्ययः)–उत्थित (√उत्-स्था + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | न्ध्य | म | न्द | र | सं | का | शं |
| का | ञ्च | ना | ङ्ग | द | भू | ष | णम् |
| स्र | व | न्तं | रु | धि | रं | व | क्त्रा |
| द्व | र्ष | मे | घ | मि | वो | त्थि | तम् |