पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| प्रतस्थुर् | प्रतस्थुः (√प्र-स्था लिट् प्र.पु. बहु.) |
| महात्मानो | महात्मन् (१.३) |
| बलैर् | बल (३.३) |
| अप्रतिमैर् | अप्रतिम (३.३) |
| वृताः | वृत (√वृ + क्त, १.३) |
| सुरा | सुर (१.३) |
| इवामरावत्यां | इव (अव्ययः)–अमरावती (७.१) |
| बलैर् | बल (३.३) |
| अप्रतिमैर् | अप्रतिम (३.३) |
| वृताः | वृत (√वृ + क्त, १.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | प्र | त | स्थु | र्म | हा | त्मा | नो |
| ब | लै | र | प्र | ति | मै | र्वृ | ताः |
| सु | रा | इ | वा | म | रा | व | त्यां |
| ब | लै | र | प्र | ति | मै | र्वृ | ताः |