ततो हतान्राक्षसपुंगवांस्ता;न्देवान्तकादित्रिशिरोऽतिकायान् ।
रक्षोगणास्तत्र हतावशिष्टा;स्ते रावणाय त्वरितं शशंसुः ॥
ततो हतान्राक्षसपुंगवांस्ता;न्देवान्तकादित्रिशिरोऽतिकायान् ।
रक्षोगणास्तत्र हतावशिष्टा;स्ते रावणाय त्वरितं शशंसुः ॥
अन्वयः
ततः then, स्तत्र there, हतावशिष्टाः those survived the killings, ते they, रक्षोगणाः Rakshasa troops, त्वरिताः hurriedly, राक्षसपुङ्गवान् Rakshasas leader, तान् him, देवान्तकादित्रिशिरोतिकायन् Devanthaka, Trisira, Atikaya, हतान् having been killed, रावणाय to Ravana, शशंसुः reported.M N Dutt
Those Raksas that remained after the others had been slain, swiftly informed Răvaņa that all those foremost of Rākşasas Devantaka and the rest, Trisiras, Atikāya and others-had been slain.Summary
Then the Rakshasas who survived the killings, hurriedly reported to the Rakshasa king, Ravana about the killing of Devanthaka, Trisira and Atikaya.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| हतान् | हत (√हन् + क्त, २.३) |
| राक्षसपुंगवांस्तान् | राक्षस–पुंगव (२.३)–तद् (२.३) |
| देवान्तकादित्रिशिरोऽतिकायान् | देवान्तक–आदि–त्रिशिरस्–अतिकाय (२.३) |
| रक्षोगणास्तत्र | रक्षस्–गण (१.३)–तत्र (अव्ययः) |
| हतावशिष्टास् | हत (√हन् + क्त)–अवशिष्ट (√अव-शिष् + क्त, १.३) |
| ते | तद् (१.३) |
| रावणाय | रावण (४.१) |
| त्वरितं | त्वरित (२.१) |
| शशंसुः | शशंसुः (√शंस् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ह | ता | न्रा | क्ष | स | पुं | ग | वां | स्ता |
| न्दे | वा | न्त | का | दि | त्रि | शि | रो | ऽति | का | यान् |
| र | क्षो | ग | णा | स्त | त्र | ह | ता | व | शि | ष्टा |
| स्ते | रा | व | णा | य | त्व | रि | तं | श | शं | सुः |