अन्वयः
तदा then, हुतभुक् fire, तेषाम् their, गृहसहस्राणि thousands of houses, ददाह burnt, पर्वताकाराः of mountain like form, प्रासादाः mansions, धरणीतले on the ground, पतन्ति collapsed.
Summary
Then thousands of their houses were burnt by fire (consumer of offerings), and mountain like mansions collapsed to the ground.
पदच्छेदः
| तेषां | तद् (६.३) |
| गृहसहस्राणि | गृह–सहस्र (२.३) |
| ददाह | ददाह (√दह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| हुतभुक् | हुतभुज् (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| आवासान् | आवास (२.३) |
| राक्षसानां | राक्षस (६.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| गृहमेधिनाम् | गृहमेधिन् (६.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | षां | गृ | ह | स | ह | स्रा | णि |
| द | दा | ह | हु | त | भु | क्त | दा |
| आ | वा | सा | न्रा | क्ष | सा | नां | च |
| स | र्वे | षां | गृ | ह | मे | धि | नाम् |