अन्वयः
अयंरावणः this Ravana, मम my, चक्षुर्विषयम् range of my vision, आगत्य having come, दृष्टिविषस्य poison in the vision, सर्पस्य snake's, दृष्टिम् इव vision like, वैनतेस्य Garuda's, दृष्टिम् sight, प्राप्तः come under, भुजङ्गमःयथावा like the serpent, जीवितुम् life, नार्हति not survive
Summary
"This Ravana, having come within the range of my vision, will not survive today, like the serpent having poison in the vision coming in the range of Garuda cannot survive."
पदच्छेदः
| चक्षुर्विषयम् | चक्षुस्–विषय (२.१) |
| आगम्य | आगम्य (√आ-गम् + ल्यप्) |
| नायं | न (अव्ययः)–इदम् (१.१) |
| जीवितुम् | जीवितुम् (√जीव् + तुमुन्) |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् लट् प्र.पु. एक.) |
| दृष्टिं | दृष्टि (२.१) |
| दृष्टिविषस्येव | दृष्टिविष (६.१)–इव (अव्ययः) |
| सर्पस्य | सर्प (६.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| रावणः | रावण (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| च | क्षु | र्वि | ष | य | मा | ग | म्य |
| ना | यं | जी | वि | तु | म | र्ह | ति |
| दृ | ष्टिं | दृ | ष्टि | वि | ष | स्ये | व |
| स | र्प | स्य | म | म | रा | व | णः |