पदच्छेदः
| प्रगृह्य | प्रगृह्य (√प्र-ग्रह् + ल्यप्) |
| परमक्रुद्धाः | परम–क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.३) |
| समुत्पत्य | समुत्पत्य (√समुत्-पत् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| राक्षसाः | राक्षस (१.३) |
| अब्रुवन् | अब्रुवन् (√ब्रू लङ् प्र.पु. बहु.) |
| रावणं | रावण (२.१) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| प्रदीप्ता | प्रदीप्त (√प्र-दीप् + क्त, १.३) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| तेजसा | तेजस् (३.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | गृ | ह्य | प | र | म | क्रु | द्धाः |
| स | मु | त्प | त्य | च | रा | क्ष | साः |
| अ | ब्रु | व | न्रा | व | णं | स | र्वे |
| प्र | दी | प्ता | इ | व | ते | ज | सा |