अन्वयः
तदा then, रावणः Ravana, तेषाम् those, वाजिनाम् horses, असम्भ्रमम् unagitated, दृष्टवा perceiving, भूयः exceedingly, एव just, सुसङ्क्रुद्धः highly enraged, शरवर्षम् shower of arrows, मुमोच ह released
Summary
Ravana perceived that the horses were just unperturbed by his arrows, became enraged and showered arrows excessively.
पदच्छेदः
| तेषाम् | तद् (६.३) |
| असंभ्रमं | असम्भ्रम (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| वाजिनां | वाजिन् (६.३) |
| रावणस्तदा | रावण (१.१)–तदा (अव्ययः) |
| भूय | भूयस् (अव्ययः) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| सुसंक्रुद्धः | सु (अव्ययः)–संक्रुद्ध (√सम्-क्रुध् + क्त, १.१) |
| शरवर्षं | शर–वर्ष (२.१) |
| मुमोच | मुमोच (√मुच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | षा | म | सं | भ्र | मं | दृ | ष्ट्वा |
| वा | जि | नां | रा | व | ण | स्त | दा |
| भू | य | ए | व | सु | सं | क्रु | द्धः |
| श | र | व | र्षं | मु | मो | च | ह |