पदच्छेदः
| प्रतिहारस्ततस्तूर्णम् | प्रतिहार (१.१)–ततस् (अव्ययः)–तूर्णम् (अव्ययः) |
| अगस्त्यवचनाद् | अगस्त्य–वचन (५.१) |
| अथ | अथ (अव्ययः) |
| समीपं | समीप (२.१) |
| राघवस्याशु | राघव (६.१)–आशु (अव्ययः) |
| प्रविवेश | प्रविवेश (√प्र-विश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ति | हा | र | स्त | त | स्तू | र्ण |
| म | ग | स्त्य | व | च | ना | द | थ |
| स | मी | पं | रा | घ | व | स्या | शु |
| प्र | वि | वे | श | म | हा | त्म | नः |