M N Dutt
Therefore, O you of unrivalled prowess, if you should render the same (back), I shall be highly gratified; and righteousness also you will maintain.
पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| यदि | यदि (अव्ययः) |
| साम्नैतां | सामन् (३.१)–एतद् (२.१) |
| दद्याद् | दद्यात् (√दा विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| अतुलविक्रम | अतुल–विक्रम (८.१) |
| कृता | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| भवेन्मम | भवेत् (√भू विधिलिङ् प्र.पु. एक.)–मद् (६.१) |
| प्रीतिर् | प्रीति (१.१) |
| धर्मश्चैवानुपालितः | धर्म (१.१)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः)–अनुपालित (√अनु-पालय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | द्भ | वा | न्य | दि | सा | म्नै | तां |
| द | द्या | द | तु | ल | वि | क्र | म |
| कृ | ता | भ | वे | न्म | म | प्री | ति |
| र्ध | र्म | श्चै | वा | नु | पा | लि | तः |