M N Dutt
Having regard that this body is uncertain, that foolish person, that does not acquire asceticism, dying go the way that he deserve.
पदच्छेदः
| अध्रुवे | अध्रुव (७.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| शरीरे | शरीर (७.१) |
| यो | यद् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| करोति | करोति (√कृ लट् प्र.पु. एक.) |
| तपोऽर्जनम् | तपस्–अर्जन (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| पश्चात् | पश्चात् (अव्ययः) |
| तप्यते | तप्यते (√तप् प्र.पु. एक.) |
| मूढो | मूढ (√मुह् + क्त, १.१) |
| मृतो | मृत (√मृ + क्त, १.१) |
| दृष्ट्वात्मनो | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा)–आत्मन् (६.१) |
| गतिम् | गति (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | ध्रु | वे | हि | श | री | रे | यो |
| न | क | रो | ति | त | पो | ऽर्ज | नम् |
| स | प | श्चा | त्त | प्य | ते | मू | ढो |
| मृ | तो | दृ | ष्ट्वा | त्म | नो | ग | तिम् |