बुद्धिं रूपं बलं वित्तं पुत्रान्माहात्म्यमेव च ।
प्रप्नुवन्ति नराः सर्वं स्वकृतैः पूर्वकर्मभिः ॥
बुद्धिं रूपं बलं वित्तं पुत्रान्माहात्म्यमेव च ।
प्रप्नुवन्ति नराः सर्वं स्वकृतैः पूर्वकर्मभिः ॥
M N Dutt
In this world people, making their own good fortune and beauty, strength, sons, wealth and valour, gain these by virtue of their pious acts.पदच्छेदः
| बुद्धिं | बुद्धि (२.१) |
| रूपं | रूप (२.१) |
| बलं | बल (२.१) |
| वित्तं | वित्त (२.१) |
| पुत्रान्माहात्म्यम् | पुत्र (२.३)–माहात्म्य (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्राप्नुवन्ति | प्राप्नुवन्ति (√प्र-आप् लट् प्र.पु. बहु.) |
| नराः | नर (१.३) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| स्वकृतैः | स्व–कृत (√कृ + क्त, ३.३) |
| पूर्वकर्मभिः | पूर्व–कर्मन् (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बु | द्धिं | रू | पं | ब | लं | वि | त्तं |
| पु | त्रा | न्मा | हा | त्म्य | मे | व | च |
| प्र | प्नु | व | न्ति | न | राः | स | र्वं |
| स्व | कृ | तैः | पू | र्व | क | र्म | भिः |