पदच्छेदः
| विष्टब्धं | विष्टब्ध (√वि-स्तम्भ् + क्त, २.१) |
| पुष्पकं | पुष्पक (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| कामगं | कामग (२.१) |
| ह्यगमं | हि (अव्ययः)–अगम (२.१) |
| कृतम् | कृत (√कृ + क्त, २.१) |
| राक्षसश्चिन्तयामास | राक्षस (१.१)–चिन्तयामास (√चिन्तय् प्र.पु. एक.) |
| सचिवैस्तैः | सचिव (३.३)–तद् (३.३) |
| समावृतः | समावृत (√समा-वृ + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | ष्ट | ब्धं | पु | ष्प | कं | दृ | ष्ट्वा |
| का | म | गं | ह्य | ग | मं | कृ | तम् |
| रा | क्ष | स | श्चि | न्त | या | मा | स |
| स | चि | वै | स्तैः | स | मा | वृ | तः |