पदच्छेदः
| पर्वतं | पर्वत (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| समासाद्य | समासाद्य (√समा-सादय् + ल्यप्) |
| किंचिद् | कश्चित् (२.१) |
| रम्यवनान्तरम् | रम्य–वन–अन्तर (२.१) |
| अपश्यत् | अपश्यत् (√पश् लङ् प्र.पु. एक.) |
| पुष्पकं | पुष्पक (२.१) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| राम | राम (८.१) |
| विष्टम्भितं | विष्टम्भित (√वि-स्तम्भय् + क्त, २.१) |
| दिवि | दिव् (७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र्व | तं | स | स | मा | सा | द्य |
| किं | चि | द्र | म्य | व | ना | न्त | रम् |
| अ | प | श्य | त्पु | ष्प | कं | त | त्र |
| रा | म | वि | ष्ट | म्भि | तं | दि | वि |