M N Dutt
He saw the mighty army of that powerful monarch destroyed by the (adversary), like to a hundred streams absorbed by an approaching ocean.
पदच्छेदः
| सो | तद् (१.१) |
| ऽपश्यत | अपश्यत (√पश् लङ् प्र.पु. एक.) |
| नरेन्द्रस्तु | नरेन्द्र (१.१)–तु (अव्ययः) |
| नश्यमानं | नश्यमान (√नश् + शानच्, २.१) |
| महद् | महत् (२.१) |
| बलम् | बल (२.१) |
| महार्णवं | महत्–अर्णव (२.१) |
| समासाद्य | समासाद्य (√समा-सादय् + ल्यप्) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| पञ्चापगाजलम् | पञ्चन्–आपगा–जल (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सो | ऽप | श्य | त | न | रे | न्द्र | स्तु |
| न | श्य | मा | नं | म | ह | द्ब | लम् |
| म | हा | र्ण | वं | स | मा | सा | द्य |
| य | था | प | ञ्चा | प | गा | ज | लम् |