M N Dutt
Hearing those words of Rāghva, the exceedingly energetic Kumbhayoni spoke as follows.
पदच्छेदः
| तास्तु | तद् (१.३)–तु (अव्ययः) |
| सर्वाः | सर्व (१.३) |
| प्रतिगताः | प्रतिगत (√प्रति-गम् + क्त, १.३) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
| प्रीतः | प्रीत (√प्री + क्त, १.१) |
| स | तद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| महातेजा | महत्–तेजस् (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| एतद् | एतद् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्य | त | द्व | च | नं | श्रु | त्वा |
| रा | घ | व | स्य | म | हा | त्म | नः |
| कु | म्भ | यो | नि | र्म | हा | ते | जा |
| वा | क्य | मे | त | दु | वा | च | ह |