पदच्छेदः
| महर्षे | महत्–ऋषि (८.१) |
| देवगन्धर्वविहार | देव–गन्धर्व–विहार (८.१) |
| समरप्रिय | समर–प्रिय (८.१) |
| अहं | मद् (१.१) |
| खलूद्यतो | खलु (अव्ययः)–उद्यत (√उत्-यम् + क्त, १.१) |
| गन्तुं | गन्तुम् (√गम् + तुमुन्) |
| विजयार्थी | विजय–अर्थिन् (१.१) |
| रसातलम् | रसातल (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ह | र्षे | दे | व | ग | न्ध | र्व |
| वि | हा | र | स | म | र | प्रि | य |
| अ | हं | ख | लू | द्य | तो | ग | न्तुं |
| वि | ज | या | र्थी | र | सा | त | लम् |