पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शोणितदिग्धाङ्गाः | शोणित–दिग्ध (√दिह् + क्त)–अङ्ग (१.३) |
| सर्वशस्त्रसमाहताः | सर्व–शस्त्र–समाहत (√समा-हन् + क्त, १.३) |
| अमात्या | अमात्य (१.३) |
| राक्षसेन्द्रस्य | राक्षस–इन्द्र (६.१) |
| चक्रुर् | चक्रुः (√कृ लिट् प्र.पु. बहु.) |
| आयोधनं | आयोधन (२.१) |
| महत् | महत् (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | तु | शो | णि | त | दि | ग्धा | ङ्गाः |
| स | र्व | श | स्त्र | स | मा | ह | ताः |
| अ | मा | त्या | रा | क्ष | से | न्द्र | स्य |
| च | क्रु | रा | यो | ध | नं | म | हत् |