M N Dutt
And snapping those weapons and resisting (those volleys of) arms, they smote at the Räkșasa fighting alone by hundreds and thousands.
पदच्छेदः
| तांस्तु | तद् (२.३)–तु (अव्ययः) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| समाक्षिप्य | समाक्षिप्य (√समा-क्षिप् + ल्यप्) |
| तद् | तद् (२.१) |
| अस्त्रम् | अस्त्र (२.१) |
| अपहत्य | अपहत्य (√अप-हन् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| जघ्नुस्ते | जघ्नुः (√हन् लिट् प्र.पु. बहु.)–तद् (१.३) |
| राक्षसं | राक्षस (२.१) |
| घोरम् | घोर (२.१) |
| एकं | एक (२.१) |
| शतसहस्रकः | शत–सहस्रक (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तां | स्तु | स | र्वा | न्स | मा | क्षि | प्य |
| त | द | स्त्र | म | प | ह | त्य | च |
| ज | घ्नु | स्ते | रा | क्ष | सं | घो | र |
| मे | कं | श | त | स | ह | स्र | कः |