पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| लोकास्त्रयस्त्रस्ताः | लोक (१.३)–त्रि (१.३)–त्रस्त (√त्रस् + क्त, १.३) |
| कम्पन्ते | कम्पन्ते (√कम्प् लट् प्र.पु. बहु.) |
| च | च (अव्ययः) |
| दिवौकसः | दिवौकस् (१.३) |
| कालं | काल (२.१) |
| क्रुद्धं | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, २.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| लोकत्रयभयावहम् | लोकत्रय–भय–आवह (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | लो | का | स्त्र | य | स्त्र | स्ताः |
| क | म्प | न्ते | च | दि | वौ | क | सः |
| का | लं | क्रु | द्धं | त | दा | दृ | ष्ट्वा |
| लो | क | त्र | य | भ | या | व | हम् |