पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| राक्षसराजस्य | राक्षस–राज (६.१) |
| स्वसा | स्वसृ (१.१) |
| परमदुःखिता | परम–दुःखित (१.१) |
| पादयोः | पाद (७.२) |
| पतिता | पतित (√पत् + क्त, १.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| वक्तुम् | वक्तुम् (√वच् + तुमुन्) |
| एवोपचक्रमे | एव (अव्ययः)–उपचक्रमे (√उप-क्रम् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | रा | क्ष | स | रा | ज | स्य |
| स्व | सा | प | र | म | दुः | खि | ता |
| पा | द | योः | प | ति | ता | त | स्य |
| व | क्तु | मे | वो | प | च | क्र | मे |