पदच्छेदः
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| मातृष्वसुः | मातृष्वसृ (६.१) |
| पुत्रो | पुत्र (१.१) |
| भ्राता | भ्रातृ (१.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| खरः | खर (१.१) |
| प्रभुः | प्रभु (१.१) |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.) |
| सदा | सदा (अव्ययः) |
| कुर्वन् | कुर्वत् (√कृ + शतृ, १.१) |
| यद् | यद् (२.१) |
| वक्ष्यसि | वक्ष्यसि (√वच् लृट् म.पु. ) |
| वचः | वचस् (२.१) |
| स्वयम् | स्वयम् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त्र | मा | तृ | ष्व | सुः | पु | त्रो |
| भ्रा | ता | त | व | ख | रः | प्र | भुः |
| भ | वि | ष्य | ति | स | दा | कु | र्व |
| न्य | द्व | क्ष्य | सि | व | चः | स्व | यम् |