पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तैः | तद् (३.३) |
| सर्वैः | सर्व (३.३) |
| परिवृतो | परिवृत (√परि-वृ + क्त, १.१) |
| राक्षसैर् | राक्षस (३.३) |
| घोरदर्शनैः | घोर–दर्शन (३.३) |
| खरः | खर (१.१) |
| सम्प्रययौ | सम्प्रययौ (√सम्प्र-या लिट् प्र.पु. एक.) |
| शीघ्रं | शीघ्रम् (अव्ययः) |
| दण्डकान् | दण्डक (२.३) |
| अकुतोभयः | अकुतोभय (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | तैः | स | र्वैः | प | रि | वृ | तो |
| रा | क्ष | सै | र्घो | र | द | र्श | नैः |
| ख | रः | सं | प्र | य | यौ | शी | घ्रं |
| द | ण्ड | का | न | कु | तो | भ | यः |