M N Dutt
However, what is done is done, there is virtue in this, no doubt; come, o gentle one, we shall go to our house.
पदच्छेदः
| एहीदानीं | एहि (√आ-इ लोट् म.पु. )–इदानीम् (अव्ययः) |
| कृतं | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| यद्धि | यद् (१.१)–हि (अव्ययः) |
| तद् | तद् (२.१) |
| अकर्तुं | अकर्तुम् (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| शक्यते | शक्यते (√शक् प्र.पु. एक.) |
| आगच्छ | आगच्छ (√आ-गम् लोट् म.पु. ) |
| सौम्य | सौम्य (८.१) |
| गच्छामः | गच्छामः (√गम् लट् उ.पु. द्वि.) |
| स्वम् | स्व (२.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| भवनं | भवन (२.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | ही | दा | नीं | कृ | तं | य | द्धि |
| त | द | क | र्तुं | न | श | क्य | ते |
| आ | ग | च्छ | सौ | म्य | ग | च्छा | मः |
| स्व | मे | व | भ | व | नं | प्र | ति |