पदच्छेदः
| लक्षिण्यो | लक्षिन् (१.३) |
| रत्नभूताश्च | रत्न–भूत (√भू + क्त, १.३)–च (अव्ययः) |
| देवदानवरक्षसाम् | देव–दानव–रक्षस् (६.३) |
| नानाभूषणसम्पन्ना | नाना (अव्ययः)–भूषण–सम्पन्न (√सम्-पद् + क्त, १.३) |
| ज्वलन्त्यः | ज्वलत् (√ज्वल् + शतृ, १.३) |
| स्वेन | स्व (३.१) |
| तेजसा | तेजस् (३.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ल | क्षि | ण्यो | र | त्न | बू | ता | श्च |
| दे | व | दा | न | व | र | क्ष | साम् |
| ना | ना | भू | ष | ण | सं | प | न्ना |
| ज्व | ल | न्त्यः | स्वे | न | ते | ज | सा |