पदच्छेदः
| सा | तद् (१.१) |
| विमुक्ता | विमुक्त (√वि-मुच् + क्त, १.१) |
| ततो | तत (√तन् + क्त, १.१) |
| रम्भा | रम्भा (१.१) |
| भ्रष्टमाल्यविभूषणा | भ्रष्ट (√भ्रंश् + क्त)–माल्य–विभूषण (१.१) |
| गजेन्द्राक्रीडमथिता | गज–इन्द्र–आक्रीड–मथित (√मथ् + क्त, १.१) |
| नदीवाकुलतां | नदी (१.१)–इव (अव्ययः)–आकुल–ता (२.१) |
| गता | गत (√गम् + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | वि | मु | क्ता | त | तो | र | म्भा |
| भ्र | ष्ट | मा | ल्य | वि | भू | ष | णा |
| ग | जे | न्द्रा | क्री | ड | म | थि | ता |
| न | दी | वा | कु | ल | तां | ग | ता |