पदच्छेदः
| वरप्रदानाद् | वर–प्रदान (५.१) |
| बलवान्न | बलवत् (१.१)–न (अव्ययः) |
| खल्वन्येन | खलु (अव्ययः)–अन्य (३.१) |
| हेतुना | हेतु (३.१) |
| तच्च | तद् (१.१)–च (अव्ययः) |
| सत्यं | सत्य (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| कर्तव्यं | कर्तव्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| वाक्यं | वाक्य (१.१) |
| देव | देव (८.१) |
| प्रजापतेः | प्रजापति (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | र | प्र | दा | ना | द्ब | ल | वा |
| न्न | ख | ल्व | न्ये | न | हे | तु | ना |
| त | च्च | स | त्यं | हि | क | र्त | व्यं |
| वा | क्यं | दे | व | प्र | जा | प | तेः |