M N Dutt
Thereupon having entered into the army up to a hundred leagues the lord of Rākşasas overpowered the celestial host with a downpour of shafts.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| योजनशतं | योजन–शत (२.१) |
| प्रविष्टो | प्रविष्ट (√प्र-विश् + क्त, १.१) |
| राक्षसाधिपः | राक्षस–अधिप (१.१) |
| देवतानां | देवता (६.३) |
| बलं | बल (२.१) |
| कृत्स्नं | कृत्स्न (२.१) |
| शरवर्षैर् | शर–वर्ष (३.३) |
| अवाकिरत् | अवाकिरत् (√अव-कृ लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | स | यो | ज | न | श | तं |
| प्र | वि | ष्टो | रा | क्ष | सा | धि | पः |
| दे | व | ता | नां | ब | लं | कृ | त्स्नं |
| श | र | व | र्षै | र | वा | कि | रत् |