पदच्छेदः
| सहस्रशिखरोपेतं | सहस्र–शिखर–उपेत (√उप-इ + क्त, २.१) |
| सिंहाध्युषितकन्दरम् | सिंह–अध्युषित (√अधि-वस् + क्त)–कन्दर (२.१) |
| प्रपातपतितैः | प्रपात–पतित (√पत् + क्त, ३.३) |
| शीतैः | शीत (३.३) |
| साट्टहासम् | स (अव्ययः)–अट्टहास (२.१) |
| इवाम्बुभिः | इव (अव्ययः)–अम्बु (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | ह | स्र | शि | ख | रो | पे | तं |
| सिं | हा | ध्यु | षि | त | क | न्द | रम् |
| प्र | पा | त | प | ति | तैः | शी | तैः |
| सा | ट्ट | हा | स | मि | वा | म्बु | भिः |