पदच्छेदः
| देवदानवगन्धर्वैः | देव–दानव–गन्धर्व (३.३) |
| साप्सरोगणकिंनरैः | स (अव्ययः)–अप्सरस्–गण–किंनर (३.३) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| स्त्रीभिः | स्त्री (३.३) |
| क्रीडमानैः | क्रीडमान (√क्रीड् + शानच्, ३.३) |
| स्वर्गभूतं | स्वर्ग–भूत (√भू + क्त, २.१) |
| महोच्छ्रयम् | महत्–उच्छ्रय (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | व | दा | न | व | ग | न्ध | र्वैः |
| सा | प्स | रो | ग | ण | किं | न | रैः |
| सा | ह | स्त्री | भिः | क्री | ड | मा | नैः |
| स्व | र्ग | भू | तं | म | हो | च्छ्र | यम् |