पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽनुद्भ्रान्तशकुनां | अनुद्भ्रान्त–शकुन (२.१) |
| स्वाभाव्ये | स्वाभाव्य (७.१) |
| परमे | परम (७.१) |
| स्थिताम् | स्थित (√स्था + क्त, २.१) |
| निर्विकाराङ्गनाभासां | निर्विकार–अङ्गना–आभास (२.१) |
| पश्यते | पश्यते (√पश् लट् प्र.पु. एक.) |
| रावणो | रावण (१.१) |
| नदीम् | नदी (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ऽनु | द्भ्रा | न्त | श | कु | नां |
| स्वा | भा | व्ये | प | र | मे | स्थि | ताम् |
| नि | र्वि | का | रा | ङ्ग | ना | भा | सां |
| प | श्य | ते | रा | व | णो | न | दीम् |