M N Dutt
As the mountains suffer many clappings of thunder-bolts so did they bear many strokes.पदच्छेदः
| वज्रप्रहारान् | वज्र–प्रहार (२.३) |
| अचला | अचल (१.३) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| घोरान् | घोर (२.३) |
| विषेहिरे | विषेहिरे (√वि-सह् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| गदाप्रहारांस्तद्वत् | गदा–प्रहार (२.३)–तद्वत् (अव्ययः) |
| तौ | तद् (१.२) |
| सहेते | सहेते (√सह् लट् प्र.पु. द्वि.) |
| नरराक्षसौ | नर–राक्षस (१.२) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | ज्र | प्र | हा | रा | न | च | ला |
| य | था | घो | रा | न्वि | षे | हि | रे |
| ग | दा | प्र | हा | रां | स्त | द्व | त्तौ |
| स | हे | ते | न | र | रा | क्ष | सौ |