तं धर्मेऽग्निषु भृत्येषु शिवं पृष्ट्वाथ पार्थिवम् ।
पुलस्त्योवाच राजानं हैहयानां तदार्जुनम् ॥
तं धर्मेऽग्निषु भृत्येषु शिवं पृष्ट्वाथ पार्थिवम् ।
पुलस्त्योवाच राजानं हैहयानां तदार्जुनम् ॥
M N Dutt
Thereupon having enquired of the king about his piety, offerings and the well-being of his sons, Pulastya said to Arjuna, the king of Haihayas.पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| धर्मे | धर्म (७.१) |
| ऽग्निषु | अग्नि (७.३) |
| भृत्येषु | भृत्य (७.३) |
| शिवं | शिव (२.१) |
| पृष्ट्वाथ | पृष्ट्वा (√प्रच्छ् + क्त्वा)–अथ (अव्ययः) |
| पार्थिवम् | पार्थिव (२.१) |
| पुलस्त्योवाच | पुलस्त्य (१.१)–उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राजानं | राजन् (२.१) |
| हैहयानां | हैहय (६.३) |
| तदार्जुनम् | तदा (अव्ययः)–अर्जुन (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | ध | र्मे | ऽग्नि | षु | भृ | त्ये | षु |
| शि | वं | पृ | ष्ट्वा | थ | पा | र्थि | वम् |
| पु | ल | स्त्यो | वा | च | रा | जा | नं |
| है | ह | या | नां | त | दा | र्जु | नम् |